रोबिट गुप्ता – रामानुजगंज क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही भाला गिरवानी नहर परियोजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। किसानों को सिंचाई सुविधा देने के उद्देश्य से बनाई जा रही इस नहर में पानी आने से पहले ही जगह-जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं। ग्राम पंचायत के उपसरपंच और ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में गंभीर गड़बड़ी और लापरवाही के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घटिया निर्माण के कारण नहर समय से पहले ही टूटने लगी है, जिससे किसानों में चिंता बढ़ गई है।
जल संसाधन विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से भाला गिरवानी नहर का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना से भाला और विजयनगर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अभी बरसात पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई है और नहर में नियमित रूप से पानी छोड़ा भी नहीं गया है, उससे पहले ही कई हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी हैं।
नहर के कई हिस्सों में सीमेंट उखड़ने और किनारों के कमजोर पड़ने की शिकायत सामने आ रही है। एक तरफ निर्माण कार्य जारी है, तो दूसरी तरफ पहले से बने हिस्सों में टूट-फूट शुरू हो गई है। इसे देखकर ग्रामीणों और किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

1.भाला गिरवानी नहर में दरारें, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
2.करोड़ों की नहर परियोजना में गड़बड़ी के आरोप, ग्रामीणों ने जांच की मांग की
3.पानी आने से पहले टूटी नहर, किसानों में बढ़ी चिंता
4.भाला गिरवानी नहर निर्माण पर विवाद, उपसरपंच ने लगाए गंभीर आरोप
5.करोड़ों की सिंचाई योजना पर सवाल, जगह-जगह दिखीं दरारें

विभाग के कार्य में उपसरपंच का आरोप
ग्राम पंचायत के उपसरपंच ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया और अधिकारियों द्वारा सही तरीके से निगरानी भी नहीं की गई। किसानों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानक के अनुसार किया गया होता, तो इतनी जल्दी दरारें नहीं पड़तीं।
विभाग के कार्य में ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा यदि समय-समय पर सही मॉनिटरिंग और गुणवत्ता की जांच की जाती, तो शायद यह स्थिति नहीं बनती। नहर बने अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ और कई जगहों पर दरारें व टूट-फूट शुरू हो गई है। किसानों ने चिंता जताई है कि जब अभी से नहर की हालत खराब हो रही है, तो आने वाले समय में खेतों तक पानी कैसे पहुंचेगा।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो करोड़ों रुपये की यह परियोजना किसानों के लिए लाभ की बजाय परेशानी का कारण बन सकती है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

जल संसाधन विभाग के अधिकारी ने क्या कहा
वहीं जल संसाधन विभाग के एसडीओ आशीष जगत ने कहा है कि जहां-जहां दरारें आई हैं, वहां दोबारा निर्माण और मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।
हालांकि ग्राम पंचायत के उपसरपंच और ग्रामीण केवल मरम्मत नहीं बल्कि पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष और गंभीर जांच की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नहर का निर्माण मजबूत और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए, ताकि किसानों के खेतों तक सही तरीके से पानी पहुंच सके और परियोजना का वास्तविक लाभ क्षेत्र के किसानों को मिल पाए।
अब देखने वाली बात होगी कि विभाग केवल मरम्मत तक सीमित रहता है या फिर ग्रामीणों की मांग के अनुसार पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाती है।

