बलरामपुर – रोबिट गुप्ता-: देश की उभरती हुई युवा पर्वतारोही ग्रिहिता विचारे ने एक बार फिर अपनी साहसिक उपलब्धि से सबका ध्यान आकर्षित किया है। मुंबई, महाराष्ट्र की रहने वाली ग्रिहिता ने छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी गौरलाटा पीक पर सफल चढ़ाई कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। खास बात यह रही कि इस अभियान में उनके पिता सचिन विचारे भी उनके साथ मौजूद रहे।
बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड के चांदो वन परिक्षेत्र में स्थित गौरलाटा पीक प्राकृतिक सुंदरता और घने जंगलों से घिरी हुई है। समुद्र तल से लगभग 1,225 मीटर (4,022 फीट) की ऊंचाई पर स्थित यह चोटी छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा के पास मौजूद है और इसे छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटियों में गिना जाता है। दुर्गम पहाड़ी रास्तों और कठिन मौसम के कारण यहां तक पहुंचना आसान नहीं माना जाता, लेकिन ग्रिहिता ने पूरे आत्मविश्वास, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया।

ग्रिहिता की इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल देखा जा रहा है। कम उम्र में लगातार बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रही ग्रिहिता आज देशभर के युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा बनती जा रही हैं। वह केवल एक पर्वतारोही ही नहीं बल्कि “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” अभियान की प्रेरणादायक संदेशवाहक भी हैं।
1.मुंबई की बेटी ने छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी पर दर्ज की ऐतिहासिक सफलता
2.दुर्गम रास्तों को पार कर नन्हीं पर्वतारोही ने बढ़ाया देश का गौरव
3.कम उम्र में अद्भुत कारनामा, बुलंद इरादों से हासिल की नई ऊंचाई
4.साहस और जुनून की मिसाल बनी युवा प्रतिभा, हर तरफ हो रही सराहना
5.पहाड़ों की कठिन चुनौती को पार कर बेटियों के सपनों को दी नई उड़ान
इससे पहले ग्रिहिता एवरेस्ट बेस कैंप की कठिन यात्रा पूरी कर चुकी हैं। इसके अलावा वह अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो और मलेशिया की प्रसिद्ध माउंट किनाबालु पर भी सफल चढ़ाई कर चुकी हैं। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
गौरलाटा अभियान के दौरान स्थानीय लोगों ने भी ग्रिहिता का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान सरपंच संघ अध्यक्ष संतोष इंजीनियर ने उनका आत्मीय स्वागत करते हुए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ग्रिहिता जैसी बेटियां देश का गौरव हैं और युवाओं को साहस, अनुशासन तथा प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान छत्तीसगढ़ के पर्वतीय और पर्यटन क्षेत्रों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संतोष इंजीनियर ने कहा
ग्रिहिता जैसी प्रतिभाएं पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं। इतनी कम उम्र में उन्होंने जिस साहस और आत्मविश्वास का परिचय दिया है, वह काबिले तारीफ है। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में वह माउंट एवरेस्ट फतह कर देश और छत्तीसगढ़ का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेंगी।
ग्रिहिता की इस उपलब्धि से क्षेत्रवासियों और पर्वतारोहण प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहां युवा मोबाइल और सोशल मीडिया में ज्यादा समय बिता रहे हैं, वहीं ग्रिहिता जैसे युवा कठिन चुनौतियों को स्वीकार कर नई मिसाल कायम कर रहे हैं। यह उपलब्धि केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा, आत्मविश्वास और देशप्रेम का संदेश भी है।
ग्रिहिता ने अपनी मेहनत, लगन और साहस से यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। आज उनकी सफलता न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
