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डेस्क न्यूज /बलरामपुर-रामानुजगंज -: जिले में आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए जिले में जल संरक्षण और भूजल संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देश तथा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) नयनतारा सिंह तोमर के मार्गदर्शन में जनपद पंचायत रामचंद्रपुर द्वारा मोर गाँव, मोर पानी महाअभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर गांवों में जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
जनभागीदारी से मिली बड़ी सफलता
जनपद पंचायत रामचंद्रपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रणवीर साय के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान को ग्रामीणों और प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला। सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप एक ही दिन में रिकॉर्ड 2000 ‘5% मॉडल’ जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया। यह उपलब्धि जनभागीदारी और सामूहिक श्रम का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने निभाई अहम भूमिका
अभियान में जनपद एवं ग्राम पंचायतों के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, सरपंचों, सचिवों, रोजगार सहायकों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं तथा आवास मित्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी के सहयोग से जल संरक्षण के इस महाअभियान को सफल बनाया गया।

क्लस्टर व्यवस्था और मॉनिटरिंग से बढ़ी कार्यक्षमता
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को विभिन्न क्लस्टरों में विभाजित कर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। वहीं, कार्यों की सतत निगरानी और त्वरित रिपोर्टिंग के लिए जनपद पंचायत स्तर पर डेटा एंट्री ऑपरेटरों के माध्यम से सभी गतिविधियों का रिकॉर्ड संधारित किया गया।

अधिकारियों और कर्मचारियों का रहा महत्वपूर्ण योगदान
इस अभियान को सफल बनाने में कार्यक्रम अधिकारी नरेगा अभिषेक द्विवेदी, अनुविभागीय अधिकारी (आरईएस) पॉल खलखो, उप अभियंता अनुपम पाण्डेय, ब्लॉक समन्वयक रविन्द्र सिंह, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक बिहान मनोज गुप्ता, सहायक विकास विस्तार अधिकारी घनश्याम विश्वकर्मा, तकनीकी सहायक नरेगा संतोष मेहता सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
भूजल स्तर सुधारने की दिशा में बड़ा कदम
प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से क्षेत्र में भूजल स्तर में सुधार होगा, वर्षा जल का बेहतर संरक्षण संभव हो सकेगा तथा भविष्य में जल संकट की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी। जल संरक्षण की दिशा में यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणादायी पहल बनकर उभर रहा है।
