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बलरामपुर/ बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चाकी में निर्माणाधीन पुलिया कार्य में नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था और बाल श्रम निषेध कानून के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण में 13 से 14 वर्ष आयु के बच्चों को मजदूरी के लिए लगाया गया है, जबकि कानून के अनुसार नाबालिग बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना प्रतिबंधित है।
7 से 10 किलोमीटर दूर से लाए गए बच्चे
जानकारी के अनुसार निर्माण स्थल पर कार्य कर रहे कई बच्चे कक्षा सातवीं, आठवीं, नवमी, तक के छात्र हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये बच्चे आसपास के गांवों के नहीं, बल्कि लगभग 7 से 10 किलोमीटर दूर स्थित क्षेत्रों से लाए गए हैं। बच्चों ने स्वयं बताया कि उन्हें मजदूरी के लिए यहां लाया गया है और निर्माण कार्य में लगाया गया है। बच्चों के अनुसार उन्हें काम पर लाने का कार्य मुंशी द्वारा किया गया है। हालांकि यह पूरा मामला जांच का विषय है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले ग्राम बनापती में पुलिया निर्माण कार्य के दौरान भी नाबालिग बच्चों को काम करते देखा गया था। अब ग्राम पंचायत चाकी में भी नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराए जाने की बात सामने आई है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों में लगातार बच्चों को काम पर लगाया जा रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
सूचना पटल नहीं होने से उठे सवाल
शासकीय निर्माण कार्यों में पारदर्शिता एवं जन जानकारी सुनिश्चित करने के लिए निर्माण कार्य प्रारंभ होने से पूर्व स्थल पर सूचना पटल बोर्ड लगाया जाना अनिवार्य होता है। इस सूचना पटल में संबंधित विभाग का नाम, कार्य का विवरण, स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी, कार्य प्रारंभ एवं पूर्ण होने की अवधि सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज रहती हैं, ताकि आम नागरिकों को कार्य से जुड़ी जानकारी आसानी से प्राप्त हो सके।
लेकिन संबंधित निर्माण स्थल पर ऐसा कोई सूचना पटल दिखाई नहीं दिया। सूचना पटल के अभाव में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि निर्माण कार्य किस विभाग द्वारा कराया जा रहा है, इसकी कुल लागत कितनी है तथा कार्य के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई है। इससे स्थानीय लोगों को निर्माण कार्य से संबंधित आवश्यक जानकारी नहीं मिल पा रही है। वहीं सूचना पटल नहीं लगाए जाने से निर्माण कार्य की पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित प्रावधानों का पालन किया गया है या नहीं, यह भी जांच का विषय बन गया
अधिकारियों की निगरानी पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की निगरानी के लिए विभागीय इंजीनियर, एसडीओ तथा अन्य अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण कर रहे थे तो उन्हें निर्माण स्थल पर कार्य करते नाबालिग बच्चे क्यों दिखाई नहीं दिए। लोगों का मानना है कि या तो निरीक्षण सही तरीके से नहीं हो रहा है या फिर मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है।
बाल श्रम कानून का खुला उल्लंघन
बाल श्रम कानून के तहत नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराना दंडनीय अपराध माना गया है। इसके बावजूद सरकारी निर्माण कार्य में बच्चों की मौजूदगी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। यह न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि उनकी शिक्षा और भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

इस संबंध में जब एसडीएम आनंद नेताम से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्चों से कार्य कराना प्रतिबंधित है और मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच के बाद लेबर इंस्पेक्टर को भी अवगत कराया जाएगा तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब क्षेत्र के लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई हैं। देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और सरकारी निर्माण कार्यों में बाल श्रम की शिकायतों पर प्रशासन कितना सख्त रुख अपनाता
