(रोबिट गुप्ता मो.6260677329)
बलरामपुर/रामचंद्रपुर-: बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बनापति में निर्माणाधीन पुलिया की गुणवत्ता को लेकर सरपंच एवं ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जिस पुलिया का वर्षों से इंतजार किया जा रहा था, उसी पुलिया के निर्माण में अनियमितता और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग के आरोप सामने आ रहे हैं। सरपंच का कहना है कि पुलिया अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई है, लेकिन उसमें कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं।

वर्षों पुरानी समस्या के समाधान के लिए हो रहा पुलिया निर्माण
जानकारी के अनुसार, गांव का खारा नाला पतरा पारा मुख्य सड़क से कटा हुआ था। बीच में स्थित नाला बरसात के दिनों में उफान पर रहता था, जिससे लोगों का आवागमन बाधित हो जाता था। नाले में पानी भर जाने के कारण स्कूली छात्रों की पढ़ाई बाधित एवं ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों के साथ-साथ बीमार और बुजुर्ग लोगों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। इसी समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण लंबे समय से पुलिया निर्माण की मांग कर रहे थे।

निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों की मांग पूरी होने पर नाले पर पुलिया निर्माण कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण स्थल पर न तो सूचना पटल बोर्ड लगाया गया है और न ही यह उल्लेख किया गया है कि कार्य किस विभाग द्वारा कराया जा रहा है तथा इसकी स्वीकृत लागत कितनी है।
सरपंच ने जताई नाराजगी, गुणवत्ता पर उठाए सवाल
ग्राम पंचायत सरपंच ने बताया कि पुलिया निर्माण की कोई आधिकारिक जानकारी पंचायत को नहीं दी गई। ग्रामीणों से शिकायत मिलने के बाद जब उन्होंने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया तो कई गंभीर खामियां सामने आईं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की जा रही है और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा। ओर न ही सूचना पटल बोर्ड लगाया गया है। और न हीं कभी कोई अधिकारी जांच करते दिखे

क्योरिंग नहीं होने से पुलिया में पड़ रही दरारें
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिया निर्माण के बाद आवश्यक क्योरिंग नहीं की जा रही है। पर्याप्त पानी नहीं डाले जाने के कारण निर्माणाधीन पुलिया में जगह-जगह दरारें उभर आई हैं। ऐसे में ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो पुलिया पहली ही बरसात में क्षतिग्रस्त हो सकती है।

निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था पर खड़े हुए प्रश्न
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लाखों रुपये की लागत से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, तो उसकी निगरानी कौन कर रहा है? यदि संबंधित विभाग के अधिकारी निरीक्षण कर रहे हैं, तो निर्माणाधीन पुलिया में दिखाई दे रही खामियां उनकी नजर से कैसे बच गईं? वहीं यदि निरीक्षण नहीं हुआ है, तो यह भी गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
लागत को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
सूत्रों के अनुसार पुलिया निर्माण की अनुमानित लागत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। सूचना बोर्ड नहीं होने के कारण परियोजना से जुड़ी कोई भी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई तथा गुणवत्ता के अनुरूप पुलिया निर्माण सुनिश्चित करने की मांग की है। अब देखना होगा कि खबर सामने आने के बाद संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
