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डेस्क न्यूज बलरामपुर/ रामचंद्रपुर -: छत्तीसगढ़ शासन ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के बड़े दावे कर रही है, लेकिन बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत महादेवपुर दो शिवानी पारा की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। यहां गांव के पूर्व बस्ती में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति कोरवा समाज के लोग आज भी पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण स्वच्छ पानी के अभाव में डबरी का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।

गंभीर पेयजल संकट
महादेवपुर की इस बस्ती में रहने वाले कोरवा समाज के लोगों की सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मोहल्ले में वर्षों पहले एक हैंडपंप लगाया गया था, लेकिन वह पिछले 4 से 5 सालों से खराब पड़ा हुआ है। कई बार पंचायत और संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

पानी के लिए रोज संघर्ष
ग्रामीणों को हर दिन पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मजबूरी में उन्हें गांव की डबरी का पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है। हालांकि यह पानी साफ नहीं है, लेकिन विकल्प न होने के कारण लोग इसी पानी पर निर्भर हैं। ग्रामीणों ने बताया करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है, जो काफी मुश्किल भरा काम है।

बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
बरसात के मौसम में कोरवा समाज के इन परिवारों की परेशानी और बढ़ जाती है। बारिश का पानी डबरी में मिल जाने से पानी दूषित हो जाता है और पीने योग्य नहीं रहता। ऐसे में या तो गंदा पानी पीने की मजबूरी होती है या फिर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है।
ग्रामीण महिला कोरवा
स्वास्थ्य पर असर
कोरवा समाज के लोगों का कहना है कि गंदा पानी पीने का असर अब ग्रामीणों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बच्चों सहित परिवार के अन्य सदस्य बार-बार बीमार पड़ रहे हैं। पेट दर्द, बुखार और अन्य बीमारियों की शिकायत लगातार बढ़ रही है।
महत्वाकांक्षी योजना से भी वंचित बड़ा सवाल जिम्मेदारों पर
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत हर गांव और हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, तो महादेवपुर की इस बस्ती में अब तक योजना का लाभ क्यों नहीं पहुंच सका?
आखिर इस गांव में जल जीवन मिशन के तहत अब तक कोई ठोस कार्य क्यों नहीं हुआ। क्या योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण कोरवा समाज के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं यह सवाल सिर्फ प्रशासन और पंचायत व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि उन सभी जिम्मेदार विभागों पर भी खड़ा होता है जो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं। अब देखना होगा कि खबर सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर क्या कदम उठाते
ग्रामीण
हम लोग कोरवा समाज से हैं और गांव के इस हिस्से में वर्षों से रह रहे हैं। पानी की समस्या बहुत गंभीर है। मजबूरी में डबरी का पानी पीना पड़ता है। कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ।
प्रशासन का आश्वासन
इस मामले में जब जनपद सीईओ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आपके माध्यम से समस्या की जानकारी मिली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले 4 से 5 दिनों के भीतर गांव में बोर खनन कराकर पेयजल समस्या का समाधान किया जाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन का यह आश्वासन कब तक धरातल पर उतरता है। क्या महादेवपुर में रहने वाले कोरवा समाज के लोगों को जल्द स्वच्छ पेयजल मिलेगा, या फिर उन्हें गंदा पानी पीने की मजबूरी झेलनी पड़ेगी। फिलहाल ग्रामीण जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
