रोबिट गुप्ता
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बलरामपुर/ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के सुरक्षित भंडारण के लिए बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम गम्हरिया में धान संग्रहण केंद्र बनाया गया है। इस संग्रहण केंद्र में विभिन्न खरीदी केंद्रों से धान लाकर रखा जाता है, ताकि धान सुरक्षित रहे और बारिश या अन्य मौसमीय प्रभावों से खराब न हो। शासन द्वारा धान की सुरक्षा को लेकर कई प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं। बड़े ट्रिपाल और अन्य सुरक्षा संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं ताकि करोड़ों रुपए की लागत से खरीदे गए धान को नुकसान न पहुंचे।
बारिश में धान सुरक्षा व्यवस्था फेल
लेकिन शुक्रवार को हुई बारिश के दौरान गम्हरिया धान संग्रहण केंद्र से जो तस्वीर सामने आई, उसने व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। बारिश शुरू होने के बाद भी बड़ी मात्रा में रखा धान खुले में पड़ा रहा। धान के स्टॉक को ढंकने की कोई गंभीर कोशिश नजर नहीं आई। वीडियो और तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि बारिश लगातार हो रही है और धान की बोरियां भीगती रही, जबकि जिम्मेदार लोग व्यवस्था बनाने में असफल दिखाई दिए।

लापरवाही से धान खराब होने का खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते धान को ढंक दिया जाता तो नुकसान की संभावना कम हो सकती थी। लेकिन लापरवाही के कारण कई जगह धान की बोरियों में नमी पहुंच गई है। कुछ बोरियों में फफूंद लगने की स्थिति भी बनने लगी है। यदि इसी तरह बारिश होती रही और धान को सुरक्षित नहीं किया गया तो बड़ी मात्रा में धान खराब हो सकता है, जिससे शासन को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

लाखों बोरी धान की सुरक्षा पर सवाल
जानकारी के अनुसार गम्हरिया संग्रहण केंद्र में अलग-अलग खरीदी केंद्रों से लाखों बोरी धान लाकर रखा गया है। संग्रहण केंद्र के प्रभारी कोमल सिंह देवांगन ने बताया कि केंद्र में कुल लगभग 6 लाख 22 हजार बोरी धान आया था। इनमें से अभी लगभग 3 लाख 7 हजार 855 बोरी धान संग्रहण केंद्र में मौजूद है। इसका कुल वजन करीब 1 लाख 29 हजार 753 दशमलव 45 क्विंटल बताया जा रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में धान खुले में रखा होना और बारिश के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

सुरक्षा संसाधनों के बावजूद भीगा धान
सबसे अहम बात यह है कि शासन और जिला प्रशासन द्वारा धान को सुरक्षित रखने के लिए पहले से ही पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बावजूद यदि धान बारिश में भीग रहा है तो यह सीधे तौर पर लापरवाही को दर्शाता है। किसानों से खरीदा गया यह धान शासन की महत्वपूर्ण संपत्ति है और इसके खराब होने से सीधा आर्थिक नुकसान होगा। साथ ही भविष्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य जरूरतों पर भी असर पड़ सकता है।
लापरवाही पर जांच और कार्रवाई की मांग
बारिश के दौरान सामने आई इन तस्वीरों के बाद अब जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय पर निगरानी और उचित प्रबंधन किया जाता तो धान को भीगने से बचाया जा सकता था। वहीं अब यह भी मांग उठने लगी है कि पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
मानसून से पहले धान सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत
फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि संग्रहण केंद्र में रखे बाकी धान को सुरक्षित किया जाए, ताकि आगे होने वाली बारिश से नुकसान न हो। आने वाले दिनों में मानसून और सक्रिय हो सकता है, ऐसे में यदि समय रहते व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और धान की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
एसडीएम में जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा
रामानुजगंज एसडीएम आनंद नेताम ने मामले को लेकर कहा है कि बारिश के दौरान धान भीगने की जानकारी प्रशासन को मिली है। संग्रहण केंद्र की लगातार मॉनिटरिंग के लिए टीम भी लगाई गई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का प्रयास है कि संग्रहण केंद्र में रखे धान को सुरक्षित रखा जाए और शासन को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
